ईको-पर्यटन की दिशा में बड़ा कदम : धमनी में नौकाविहार सुविधा शुरू, स्थानीय आजीविका को मिलेगा नया संबल

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महानदी तट स्थित ईको-पर्यटन ग्राम धमनी में शुरू हुई नई सुविधा, वन प्रबंधन समितियों और स्थानीय युवाओं के लिए खुले रोजगार के नए अवसर
रायपुर, 9 मार्च

छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों की आजीविका सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वनमण्डल बलौदाबाजार अंतर्गत ईको-पर्यटन ग्राम धमनी में नौकाविहार सुविधा का शुभारंभ किया गया। महानदी के रमणीय तट पर शुरू की गई इस नई सुविधा से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने के साथ-साथ वन प्रबंधन समितियों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर भी विकसित होंगे।


वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि ईको-पर्यटन गतिविधियाँ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जनसहभागिता के माध्यम से प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए धमनी क्षेत्र को एक आदर्श ईको-पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वन प्रबंधन समितियों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ईको-पर्यटन गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। धमनी को एक मॉडल ईको-विलेज के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है, जहाँ प्रकृति आधारित पर्यटन की विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही पर्यटकों के ठहरने के लिए भी बेहतर व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं, जिससे प्राकृतिक वातावरण के बीच पर्यटन का अनुभव और अधिक आकर्षक व यादगार बनाया जा सके।
महानदी के तट पर स्थित धमनी का प्राकृतिक सौंदर्य लंबे समय से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। हरियाली से आच्छादित वातावरण, शांत नदी तट और मनोहारी दृश्यावलियाँ इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील बनाती हैं। इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यहां ईको-पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। नौकाविहार सुविधा प्रारंभ होने से अब पर्यटक महानदी की शांत लहरों के बीच नौकायन का आनंद ले सकेंगे, जिससे क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
ईको-पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। नौकाविहार संचालन, पर्यटकों के मार्गदर्शन, स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की बिक्री जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पर्यटन का सतत विकास सुनिश्चित होगा।
वन विभाग द्वारा इस पूरे क्षेत्र का विकास प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।
इस अवसर पर परिक्षेत्र अधिकारी बलौदाबाजार प्रखर नायक, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, स्थानीय युवा तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसे आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक सहयोग का संकल्प व्यक्त किया। धमनी में शुरू हुई नौकाविहार सुविधा न केवल पर्यटन को नई दिशा देगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बनेगी।

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