Home Uncategorized ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर श्रीमती रश्मि तिर्की बनीं ‘लखपति दीदी’, स्वरोजगार से सशक्त हो रही ग्रामीण महिलाएं
राज्य - 16 minutes ago

ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर श्रीमती रश्मि तिर्की बनीं ‘लखपति दीदी’, स्वरोजगार से सशक्त हो रही ग्रामीण महिलाएं

रायपुर, 09 मार्च 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर हो रही हैं। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड की ग्राम दुलदुला निवासी श्रीमती रश्मि तिर्की भी आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई हैं।
श्रीमती रश्मि तिर्की दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि अपने आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान को भी नई दिशा दी है। आज वे अपने गांव में ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
श्रीमती तिर्की बताती हैं कि पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक ही सीमित थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण घर की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की जानकारी मिली। समूह की अन्य महिलाओं को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी कुछ नया करने की प्रेरणा मिली।
वर्ष 2025 के जुलाई माह में उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 70 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने अपने गांव में एक फास्ट फूड सेंटर की शुरुआत की। शुरुआत में छोटे स्तर से शुरू किया गया यह व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। वर्तमान में उनके फास्ट फूड सेंटर से प्रतिमाह लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है।
इस आय से श्रीमती रश्मि तिर्की अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। उनका कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे स्वयं अपने पैरों पर खड़ी हैं और अपने परिवार के लिए मजबूत सहारा बनी हुई हैं।
ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज और परिवार की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। श्रीमती रश्मि तिर्की की सफलता अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

स्व-सहायता समूह से मिली आत्मनिर्भरता की राह, शांति नगेशिया ने किराना दुकान से बदली परिवार की स्थिति

रायपुर, 09 मार्च 2026  महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूह…