स्वच्छ भारत मिशन- अर्बन 2.0 के तहत नवाचार, गरिमा और समावेशी विकास की नई कहानी

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स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सहभागिता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं। राज्यों ने बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर व्यवहार परिवर्तन तक, कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन उपलब्धियों के बीच गुजरात ने तकनीकी नवाचार और सामाजिक कल्याण को जोड़कर स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने कि दिशा में एक अग्रणी और प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।

राजकोट ने उन्नत रोबोटिक तकनीक को अपनाकर सीवर सफाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। 2.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस पहल ने खतरनाक मैनुअल सफाई को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सफाईमित्र ‘रोबोट ऑपरेटर’ के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, सामाजिक स्थिति और कार्य दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल “जीरो-ह्यूमन-एंट्री” विज़न को साकार करने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है ताकि सफाईमित्रों को सीवर में सीधे प्रवेश का जोखिम ना उठाना पड़े।

साथ ही, राजकोट नगर निगम द्वारा सफाई कर्मियों के लिए आधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण इस दिशा में एक सराहनीय कदम है। यह भवन न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए समर्पित स्थान प्रदान करेगा, बल्कि सफाई कर्मियों को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी देगा। इसमें विवाह एवं कार्यक्रम हॉल, रसोई, भोजन कक्ष, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो लगभग 5000 से अधिक सफाई कर्मियों के परिवारों को लाभान्वित करेंगी।

वहीं, भरूच नगर पालिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सफाईमित्रों के लिए आयोजित स्वास्थ्य शिविर भी गुजरात की संवेदनशीलता को दर्शाता है। 108 महिला कर्मियों के लिए आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य जांच, दवाइयों का वितरण और पोषण एवं स्वच्छता पर नियमित मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और जागरूकता में वृद्धि हुई। इन पहलों के माध्यम से स्पष्ट होता है कि गुजरात न केवल स्वच्छता के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि वह अपने स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी प्रतिबद्ध है। SBM-U 2.0 के तहत राज्य ने तकनीक, संरचना और सामाजिक कल्याण को एक साथ जोड़कर एक संतुलित और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल प्रस्तुत किया।  

अंततः, गुजरात की ये सारी पहल यह दर्शाती हैं कि स्वच्छता केवल दैनिक सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सम्मान, सुरक्षा और समानता से जुड़ी एक व्यापक सोच है। यदि इसी तरह नवाचार और समावेशी दृष्टिकोण अपनाया जाता रहा, तो “स्वच्छ भारत” का सपना न केवल साकार होगा, बल्कि एक सशक्त और गरिमामय समाज की नींव भी मजबूत होगी।

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