वीर बाल दिवस भूतकाल की स्मृति और पुनःअवलोकन,अमर हो गए वो बलिदानी जो हिंदू से सिख योद्धा बने,वो मुस्लिम जिन्होंने सहायता की,दीवान टोडरमल : प्रदेश महासचिव सिंह

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छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश महासचिव बिरेंदर सिंह ने गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के वीर सपूतों के बलिदान पर स्मृति दिवस वीर बाल दिवस को अमर बताया,श्री सिंह ने कहा वीर बाल दिवस न केवल गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का पारिवारिक बलिदान रहा जिसमें ऐसी पीड़ा को भी शांत रह कर गुरु गोविंद सिंह जी महाराज और उनके समर्थकों ने सहा उसका पुनः अवलोकन करना चाहिए,जिस राष्ट्र की जनता औरंगजेब के धर्मांतरण के पागलपन के कारण इतिहास के सबसे क्रूर अत्याचार से त्राहि त्राहि मच गई,वजीर खान ने भी सारी हदें पार कर केवल गुरुमहराज सहित 40 सिखों को किले में घेरकर आत्मसमर्पण करने कहा,जिसका परिणाम इस्लाम कुबूल करवाना था,लेकिन उन योद्धाओं ने जिनमें साहेबजादा अजित सिंह,जुझार सिंह जी भी ने अपनी बहादुरी से दुश्मनों की फौज जिसमें हिन्दू सहयोगी राजा भी शामिल थे,ऐसे वीरता से सफाया किया की जैसे साक्षात् चंडी मां स्वयं संहार कर रही हो,परंतु दुश्मनों की विशाल फौज के आगे प्राण न्योछावर कर दिए।गुरु महाराज ने ये सब धैर्य से देखा,लेकिन ये युद्ध तो उन अबला बेटी बहु,और हिन्दुओं के जनेऊ और चोटी की रक्षा के लिए लिए गए प्रण के लिए था जिसमें गुरु गोविंद महाराज तो क्या उनके नन्हे बच्चे जोरावर और फतह सिंह भी पीछे नहीं हटे, जिन्हें जीवित दीवार में प्राण त्यागने तक चुनवा दिया गया। वीर बाल दिवस हमे शिक्षा देता है कि जब जब हम बंटेंगे, कोई मानवता के खिलाफ वाला औरंगजेब खड़ा होगा,गुरु महाराज का साथ देने वाले हिन्दू से सिख बने योद्धाओं,उन मुसलमानों का जिन्होंने कई अवसर पर मानवता का परिचय देकर गुरु महाराज का यथासंभव सहायता की,दीवान टोडरमल जिन्होंने अपनी पूंजी का बड़ा भाग सोने के सिक्कों से गुरु महाराज के बच्चों के क्रियाकर्म हेतु लगान चुकाया,ऐसे सभी सहयोगी भी अमर हो गए,लेकिन हम आज बात बात पर आपस में लड़ कर मानवता के विरोधी किसी औरंगजेब के पक्ष में जाने अनजाने साथ दे रहे हैं,ये ज्ञान रखना होगा,श्री सिंह ने सभी से अपील की,एक रहें संविधान और राष्ट्र की रक्षा हेतु पद,प्रतिष्ठा,धन का छोटा मोटा त्याग करना भी पड़े तो पीछे नहीं हटना है,क्योंकि ये त्याग गुरु गोविंद सिंह महाराज और असंख्य भारत माता के स्वतंत्रता हेतु वीर बलिदानियों के त्याग से ज्यादा नहीं है,जिसकारण आज हम सब सर ऊंचा कर जीवन यापन करते हैं।

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