अस्पष्टताओं को कम करना और अन्वेषण गतिविधि के विस्तार के साथ दीर्घकालिक योजना का समर्थन करना है।

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डीजीएच ने बताया कि अद्यतन एमआरएससी किस प्रकार विधायी और नियामक सुधारों के माध्यम से किए गए परिवर्तनों को क्रियान्वित करता है, जिससे नीतिगत उद्देश्य और संविदात्मक कार्यान्वयन के बीच सामंजस्य सुनिश्चित होता है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव ने उद्योग जगत के प्रतिभागियों से मिली रचनात्मक और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया पर ध्यान दिया और इस बात पर बल दिया कि आगे चलकर प्रभावी और सुसंगत कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि नीतिगत निश्चितता ठोस परिणामों में परिवर्तित हो सके।

3. नए अपस्ट्रीम बोली दौर – सुधार को अवसर में बदलना

बोली प्रोत्साहन कार्यक्रम में हाल के सुधारों और डेटा-संचालित अन्वेषण पहलों से उभरने वाले निवेश के अवसरों को प्रदर्शित किया गया और इसका उद्देश्य भारत के अपस्ट्रीम क्षेत्र में व्यापक घरेलू और वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।

इस सत्र में निम्‍नलिखित विषयों का उल्‍लेख किया गया:

  • नियामक विकास
  • बेहतर डेटा उपलब्धता
  • सरकार के नेतृत्व वाली अन्वेषण पहल
  • घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना

ये सभी मिलकर भारत के अपस्ट्रीम निवेश परिदृश्य को नया आकार दे रहे हैं।

श्रीकांत नागुलपल्ली (महानिदेशक, जलकार्बन महानिदेशालय) ने आगामी बोली प्रक्रियाओं का विवरण प्रस्तुत किया:

  • ओएएलपी बोली दौर X: 182,589 वर्ग किलोमीटर में फैले 25 अन्वेषण ब्लॉक, जिनमें से 91 प्रतिशत अपतटीय क्षेत्र में हैं।
  • डीएसएफ बोली दौर IV: 9 अनुबंध क्षेत्र जिनमें 55 खोजें शामिल हैं, जिनमें लगभग 200 एमएमटीओई के 2पी भंडार हैं।
  • सीबीएम बोली दौर 2025-26: 16 ब्लॉक, जिनमें 2025 में 74 बीसीएम और 2026 में 200 बीसीएम गैस का पूर्वानुमान है।

ह्यूस्टन विश्वविद्यालय ने वैश्विक अनुरूपताओं और बेसिन मूल्यांकन पद्धतियों का उपयोग करते हुए, भारत के पूर्वी तट के बेसिनों की हाइड्रोकार्बन संभावनाओं पर अंत:र्दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

श्लम्बरगर ने डिजिटल समाधानों के माध्यम से सक्षम बेसिन-स्तरीय निवेश अवसरों पर प्रस्तुति दी, जिसमें यह प्रदर्शित किया गया कि कैसे उन्नत सबसर्फेस इमेजिंग, डेटा एनालिटिक्स और एकीकृत डिजिटल वर्कफ़्लो संभावनाओं की समझ को बढ़ा सकते हैं, विशेष रूप से सीमावर्ती और कम खोजे गए बेसिनों में।

इस सत्र में भारत के जलकार्बन क्षेत्र के लिए रणनीतिक निवेश के तर्क प्रस्तुत किए गए, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • 3.9 अरब टन तेल के समतुल्य के महत्वपूर्ण संसाधन भंडार की अभी तक खोज नहीं हो सकी है।
  • पूर्ण विपणन और मूल्य निर्धारण स्वतंत्रता के साथ एक विशाल और बढ़ता हुआ घरेलू बाजार।
  • राजस्व-साझाकरण अनुबंधों के तहत अपेक्षाकृत कम विनियामक बोझ
  • राष्ट्रीय डेटा भंडार के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन एवं तेल डेटा तक पहुंच।
  • घरेलू उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने पर केंद्रित एक मजबूत नीतिगत दृष्टिकोण

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