देश के प्रत्येक व्यक्ति को जनजातीय इतिहास को जानना चाहिए: चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत

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छत्तीसगढ़ का शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय अद्वितीय
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नवा रायपुर में बने देश का पहला डिजिटल संग्रहालय का किया अवलोकन
रायपुर, 22 फरवरी 2026

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने आज राजधानी नवा रायपुर के आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में बने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए। 


चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी। 
आदिमजाति विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा ने जनजातीय संग्रहालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री सूर्यकांत, जस्टिस श्री पी.एस.नरसिम्हा, जस्टिस श्री प्रशांत कुमार और हाईकोर्ट बिलासपुर के चीफ जस्टिस श्री रमेश सिन्हा, राजस्थान के चीफ जस्टिस श्री कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम सहित अन्य न्यायाधीश गण का बीरनमाला से आत्मीय स्वागत करने के साथ ही उन्हें स्मृति स्वरूप जनजातीय जीवन पर आधारित भित्ती चित्र भेंट किया। 
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के दौरान चीफ जस्टिस श्री सूर्यकांत सहित अन्य न्यायधीश गणों को जनजातीय विद्रोहों की पृष्ठिभूमि और जनजातीय नायकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्री बोरा ने संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में प्रदर्शित विद्रोहों को साल, साजा और महुआ के प्रतिकात्मक वृक्ष के पत्तों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया है। संग्रहालय में बने यह वृक्ष उसी तरह से है जिस तरह से मोशन फिल्मों में एक वृद्ध व्यक्ति फिल्म की कहानी बताते है। 
चीफ जस्टिस श्री सूर्यकांत ने जनजातीय संग्रहालय में प्रदर्शित भूमकाल विद्रोह के बारे में जानकर काफी प्रभावित हुए। यह विद्रोह बस्तर क्षेत्र के चित्रकोट के आस-पास वर्ष 1910 में हुआ था। यह विद्रोह 20 वर्षीय जननायक गुंडाधुर के नेतृत्व में, औपनिवेशिक वन नीतियों, जमींदारों के शोषण और बाहरी हस्तक्षेप के विरूद्ध था, जिसमें आदिवासियों ने पारंपरिक हथियारों से अंग्रेजों के खिलाफ किया था। चीफ जस्टिस ने संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार सहित अन्य जनजातीय नायकों द्वारा विद्रोह के दौरान उपयोग में लाए गए अस्त्र-शस्त्र का भी अवलोकन किया। 
चीफ जस्टिस ने गैलरी में स्थापित मां दंतेश्वरी का प्रतिकात्मक डिजिटल मंदिर से काफी प्रभावित हुए उन्होंने दो बार घंटी बजाकर मां दंतेश्वरी के दर्शन किया। उन्होंने आगामी समय बस्तर (दंतेवाड़ा) जाकर मां दंतेश्वरी की साक्षात दर्शन करने की इच्छा जाहिर की। 
उल्लेखीनय है कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 01 नवबंर 2025 को इस भव्य डिजिटल संग्रहालय को लोगों को समर्पित किया था। तब से आगुन्तकों के लिए यह संग्रहालय आर्कषण एवं उत्साह का केंद्र बना हुआ है। जनसमुदाय में इस संग्रहालय के प्रति आकर्षण और लोकप्रियता को  देखते हुए इसके द्वितीय चरण के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
गौरतलब है कि आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणी के मार्गदर्शन में जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित म्यूजियम तथा सहित वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी म्यूजियम का निर्माण तेजी के साथ पूरा हुआ है। मुख्य मंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर निर्माण से उद्घाटन तक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी श्री बोरा के नेतृत्व में बारीकी से एक-एक पहलुओं को परखा तब जाकर संग्रहालय का बुनियाद बनकर तैयार हुआ है। संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता और साहस का याद दिलाता रहेगा। यह न केवल जनजातीय वर्गो के बल्कि सभी लोगों के प्रेरणापद है। 

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