राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं के लिए दोपहर भोज का आयोजन किया

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ब्रिक्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह मंच वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है

श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया, जहाँ विविध संस्कृतियाँ, समृद्ध इतिहास और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाएँ एक संतुलित, समावेशी एवं समृद्ध विश्व व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होती हैं

श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच इन प्रयासों को और मजबूत करेगा तथा सदस्य एवं साझेदार देशों में आकार ले रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा

प्रविष्टि तिथि: 27 OCT 2026 5:36PM by PIB Delhi

राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग ले रहे ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं के लिए दोपहर भोज का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में लोकसभा के माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिरला; ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों की संसदों के माननीय अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी; माननीय केंद्रीय मंत्री; राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंश; राज्यसभा एवं लोकसभा के महासचिवों के साथ-साथ ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों का भारतीय संसद में स्वागत करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि वे एक ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर एकत्रित हुए हैं, जो भारत के संसदीय लोकतंत्र का केंद्रबिंदु है। भारत का संसदीय लोकतंत्र समय के साथ जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक विकसित हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के लिए लोकतंत्र कोई नई अवधारणा नहीं है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि उत्तर में वैशाली जैसे स्थानों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था विद्यमान थी, जबकि दक्षिण भारत में चोल शासकों ने “कुडावोलाई” प्रणाली अपनाई थी। लोकतंत्र की इसी गहरी ऐतिहासिक विरासत के कारण भारत को सही मायने में लोकतंत्र की जननी कहा जाता है।

ब्रिक्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह समूह वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने ब्रिक्स को एक ऐसे समूह के रूप में वर्णित किया, जहाँ विविध संस्कृतियाँ, समृद्ध इतिहास और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाएँ एक संतुलित, समावेशी एवं समृद्ध विश्व व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श और चर्चाएँ वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सदस्य एवं साझेदार देशों के सामूहिक संकल्प को दर्शाती हैं। यह संकल्प एकजुटता, संवाद और आपसी विश्वास के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की साझा प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त करता है।

सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान व्यक्त किए गए दृष्टिकोण का स्मरण करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस बात को रेखांकित किया था कि ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। श्री राधाकृष्णन ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि 12वां ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन इन प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा तथा सदस्य एवं साझेदार देशों में विकसित हो रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

इस आयोजन के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि भारतीय परंपरा में अतिथियों के लिए दोपहर भोज का आयोजन करना केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आत्मीयता और आपसी सम्मान की सच्ची अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि साथ बैठकर भोजन करने से नेताओं को नीतियों और शासन से आगे बढ़कर आपसी मानवीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिलता है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल आधार हैं।

इस अवसर पर आशा व्यक्त करते हुए, श्री राधाकृष्णन ने कहा कि यह दोपहर भोज सभी प्रतिनिधियों को अनौपचारिक रूप से विचारों के आदान-प्रदान और आपसी संबंधों को और गहरा बनाने का सुखद अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कामना की कि भारतीय व्यंजनों की सोंधी सुगंध, भारतीय आतिथ्य की आत्मीयता और दोपहर का यह सुहावना समय सभी विशिष्ट अतिथियों के मन में एक अमिट छाप छोड़ेगी।

अंत में, राज्यसभा के सभापति ने कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कामना की कि भारत में बिताए गए समय तथा इस सम्मेलन के दौरान पुनः प्रगाढ़ हुए और नए बने मैत्री संबंधों की स्मृतियाँ सभी के लिए सुखद एवं अविस्मरणीय रहें। उन्होंने सभी अतिथियों को भोज का आनंद लेने के लिए आमंत्रित किया और दीर्घकालिक मैत्री संबंधों की कामना के साथ अपने संबोधन का समापन किया।

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